स्वर: अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
छठ प्रसाद व डाला तैयारी, संध्या व उषा अर्घ्य के समय
पारंपरिक छठ लोकगीत
नारियरवा जे फरेला धवद से (मारबो रे सुगवा धनुख से) - अनुराधा पौडवाल
"नारियरवा जे फरेला धवद से ओह पर सुगा मिरराय... ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से सुगा गिरे मुरछाय"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
अनुराधा पौडवाल जी द्वारा स्वरबद्ध 'मारबो रे सुगवा धनुख से / नारियरवा जे फरेला धवद से' छठ महापर्व का अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक लोकगीत है। इसमें सूर्यदेव व छठी मइया के प्रसाद के रूप में नारियल, केला, अमरूद, सेब व समस्त फलों की पवित्रता की रक्षा करने और सुगवा (तोते) द्वारा फल को जूठा करने से बचाने का मार्मिक व आध्यात्मिक लोक वर्णन है।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ पूजा की सामग्री व प्रसाद तैयार करते समय, सूप-डाला सजाने और गंगा घाट पर अर्घ्य अर्पण के दौरान घर-घर में गाया जाने वाला परम पावन लोकगीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
नारियरवा जे फरेला धवद से
ओह पर सुगा मिरराय
ओह पर सुगा मिरराय
उ जे खबरि जनैबो आदित से
सुगा दिहेन जुठियाय
सुगा दिहेन जुठियाय
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से
सुगा गिरे मुरछाय
सुगा गिरे मुरछाय
ऊ जे केरवा जे फरेला धवद से
ओह पर सुगा मिरराय
ओह पर सुगा मिरराय
ऊ जे खबरि जनैबो आदित से
सुगा दिले जुठियाय
सुगा दिले जुठियाय
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से
सुगा गिरे मुरछाय
सुगा गिरे मुरछाय
अमरूदवा जे फरेला धवद से
ओह पर सुगा मिरराय
ओह पर सुगा मिरराय
ऊ जे खबरि जनैबो आदित से
सुगा दिले जुठियाय
सुगा दिले जुठियाय
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से
सुगा गिरे मुरछाय
सुगा गिरे मुरछाय
ऊ जे सेउवा जे फरेला धवद से
ओह पर सुगा मिरराय
ओह पर सुगा मिरराय
ऊ जे खबरि जनैबो आदित से
सुगा दिले जुठियाय
सुगा दिले जुठियाय
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से
सुगा गिरे मुरछाय
सुगा गिरे मुरछाय
सबे फल जे फरेलन धवद से
ओह पर सुगा मिरराय
ओह पर सुगा मिरराय
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से
सुगा गिरे मुरछाय
सुगा गिरे मुरछाय
ऊ जे सुगिनी जे रोवेले वियोग से
आदित होई ना सहाय
आदित होई ना सहाय
आदित होई ना सहाय
देव होई ना सहाय
आदित होई ना सहाय
देव होई ना सहाय