स्वर: देवी (Devi)
छठ घाट सफाई, वेदी निर्माण, संध्या व उषा अर्घ्य के समय
घाट सेवा व सफाई लोकगीत
कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया (सुनी ये सेवक लोग) - देवी | Kopi Kopi Boleli Chhathiya Maiya
"कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया सुनिये सेवक लोग... मोरा घाटे धुंधिया उपज गई ले मकड़ी बसेरा लिहले"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
लोकगायिका देवी द्वारा स्वरबद्ध 'कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया' छठ महापर्व का अत्यंत प्रिय और पारंपरिक घाट सफाई व सेवा भाव का लोकगीत है। इसमें छठ मइया अपने सेवकों से उलाहना देकर कहती हैं कि उनके घाट पर घास-फूस उग आई है और मकड़ी ने जाला बना लिया है। इस पर सभी सेवक और व्रती श्रद्धा भाव से हाथ जोड़कर मैया को आश्वस्त करते हैं कि वे घाट की सफाई करेंगे, गोबर से लीपकर चंदन छिड़केंगे, चांदनी तानेंगे, बाजा बजवाएंगे और कच्चे दूध से पावन अर्घ्य समर्पित करेंगे।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व के आरंभ में गंगा, कोसी, गंडक व पोखर घाटों की सामूहिक सफाई, सजावट, वेदी निर्माण और गोबर से लिपाई के समय गाया जाने वाला पावन पारंपरिक गीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया
सुनिये सेवक लोग
(सुनिये सेवक लोग
सुनिये सेवक लोग)
मोरा घाटे धुंधिया उपज गई ले
मकड़ी बसेरा लिहले
(मकड़ी बसेरा लिहले
मकड़ी बसेरा लिहले)
कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया
सुनिये सेवक लोग
(सुनिये सेवक लोग
सुनिये सेवक लोग)
मोरा घाटे धुंधिया उपज गई ले
मकड़ी बसेरा लिहले
(मकड़ी बसेरा लिहले
मकड़ी बसेरा लिहले)
ए हाथ जोड़ी कहेली पंकज सेवक
सुनिये छठिया मइया
(सुनिये छठिया मइया
सुनिये छठिया मइया)
रउरा घाटे दुभिया गढ़ाई देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो
(मकड़ी उजाड़ी देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो)
ए हंसी हंसी कहेली पिंकीया देई
हाथ में सिन्होरा लिहले
(हाथ में सिन्होरा लिहले
हाथ में सिन्होरा लिहले)
रउरा घाटे गोबर लिपाई देबो
चंदन छिड़काई देबो
(चंदन छिड़काई देबो
चंदन छिड़काई देबो)
ए हाथ जोड़ी कहेली अशोक सेवक
सुनिये छठिया मइया
(सुनिये छठिया मइया
सुनिये छठिया मइया)
रउरा घाटे धुंधिया गढ़ाई देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो
(मकड़ी उजाड़ी देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो)
ए हंसी हंसी कहेली परतिमा देई
हाथ में सिन्होरा लिहले
(हाथ में सिन्होरा लिहले
हाथ में सिन्होरा लिहले)
ए रउरा घाटे चान्नी तनाई देबो
ओसिया भराई देबो
(ओसिया भराई देबो
ओसिया भराई देबो)
ए हाथ जोड़ी कहेली किशोरा सेवक
सुनिये छठिया मइया
(सुनिये छठिया मइया
सुनिये छठिया मइया)
रउरा घाटे धुंधिया गढ़ाई देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो
(मकड़ी उजाड़ी देबो
मकड़ी उजाड़ी देबो)
ए हंसी हंसी कहेली उषा देई
हाथ में सिन्होरा लिहले
(हाथ में सिन्होरा लिहले
हाथ में सिन्होरा लिहले)
ए रउरा बजना बजाई देबो
दूध में अरघ देबो
(दूध में अरघ देबो
दूध में अरघ देबो)