स्वर: अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
घाट यात्रा, बहंगी प्रस्थान व अर्घ्य अर्पण के समय
पारंपरिक छठ लोकगीत
कांच ही बांस के बहंगिया - अनुराधा पौडवाल | Kaanch Hi Baans Ke Bahangiya
"कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय... होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
अनुराधा पौडवाल द्वारा स्वरबद्ध यह अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक छठ गीत बांस की बहंगी में पूजा-प्रसाद लेकर पवित्र गंगा घाट जाने की सुंदर लोक परंपरा को दर्शाता है। राहगीर (बटोहिया) जब पूछता है कि यह बहंगी किसके लिए जा रही है, तो व्रती श्रद्धापूर्वक बताते हैं कि यह परम पावन बहंगी साक्षात षष्ठी मइया (छठी मैया) के अर्घ्य के लिए जा रही है।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व के संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय सिर या कंधे पर बहंगी उठाकर गंगा घाट जाते समय गाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय व भावपूर्ण लोकगीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
होई ना बलम जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
बाट जे पूछेला बटोहिया,
बहंगी केकरा के जाय
बहंगी केकरा के जाय
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,
बहंगी छठ मैया के जाय
बहंगी छठ मैया के जाय
ओहरे जे बारी छठि मैया,
बहंगी उनका के जाय
बहंगी उनका के जाय
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
होई ना देवर जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय
बहंगी घाटे पहुंचाय
ऊंहवे जे बारि छठि मैया
बहंगी के उनके के जाय
बहंगी उनका के जाय
बाट जे पूछेला बटोहिया
बहंगी केकरा के जाय
बहंगी केकरा के जाय
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया
बहंगी छठ मैया के जाय
बहंगी छठ मैया के जाय
ऊंहवे जे बारी छठि मैया
बहंगी उनका के जाय
बहंगी उनका के जाय