स्वर: कल्पना पटवारी (Kalpana Patowary)
प्रातःकालीन उषा अर्घ्य, सूर्योदय व दर्शन की प्रतीक्षा के समय
उषा अर्घ्य विशेष
उगी उगी हे आदित मोला (दर्शन देखाई दीही) - कल्पना पटवारी | Darshan Dekhai Deehi
"उगी उगी हे आदित मोला दर्शन देखाई दीही... तीन दिन के भूखाला बरतिया के सफल बनाई दीही"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
कल्पना पटवारी द्वारा स्वरबद्ध 'दर्शन देखाई दीही / उगी उगी हे आदित मोला' छठ महापर्व के उषा अर्घ्य का अत्यंत भावपूर्ण गीत है। इसमें व्रती तीन दिनों के कठिन निर्जला व्रत के उपरांत शीतल जल में हाथ में सूप लेकर भगवान भास्कर से बादलों की ओट से बाहर आकर शीघ्र दर्शन देने और अपने पावन व्रत को सफल बनाने की प्रार्थना करते हैं।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व के चौथे दिन उषा अर्घ्य के समय गंगा व पोखर घाटों पर सूर्योदय की प्रतीक्षा में श्रद्धा व विरह भाव से गाया जाने वाला पावन लोकगीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
उगी उगी
उगी हे आदित मोला
दर्शन देखाई दीही
दर्शन देखाई दीही
दर्शन देखाई दीही
तीन दिन के
भूखाला बरतिया के
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही
घटना बदरिया ना
लउके किरिनिया
काहे ए आदित माला
सुनी ना बचनिया
देर होता बरती से बरत रउआ
हाली से उठाई लिहि
हाली से उठाई लिहि
हाली से उठाई लिहि
तीन दिन के
भूखाला बरतिया के
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही
असरे में बीती का
पनीया में दिन जी
कहा रह गईनी नाही
लउके किरिन जी
एहो जोहा तानी
लेई काला सुपवा के
नजरी उठाई दीही
नजरी उठाई दीही
नजरी उठाई दीही
तीन दिन के
भूखाला बरतिया के
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही
सफल बनाई दीही