स्वर: अनुराधा पौडवाल, कविता पौडवाल (Anuradha Paudwal, Kavita Paudwal)
उषा अर्घ्य, भोर का नदी स्नान व सूर्य वंदना के समय
अनुराधा पौडवाल कालजयी
Bhorewe Me Nadiya Nahaila || Anuradha Paudwal, Kavita Paudwal || Bhojpuri ... Chhath Puja Song ||
"भोरवे में नदिया नहाईला आदित मनाईला हो, बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
अनुराधा पौडवाल एवं कविता पौडवाल द्वारा स्वरबद्ध यह अत्यंत भावुक व कालजयी छठ गीत एक निःसंतान व्रती महिला की गहरी पीड़ा और भगवान भास्कर के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है। गोतिनी के तानों से दुखी होकर वह भोर में नदी स्नान कर अक्षत-फूल चढ़ाकर सूर्यदेव से संतान रूपी उजाले की याचना करती है, और छठी मइया व सूर्यदेव की कृपा से नौवें महीने में उसकी गोद हरी होकर होरिला (बालक) मुस्कुराता है।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व में उषा अर्घ्य के पावन भोर में गंगा घाटों पर गूंजने वाला सबसे भावविभोर कर देने वाला पारंपरिक लोकगीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
भोरवे में नदिया नहाईला आदित मनाईला हो,
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो,
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो ॥
अस धरवाईब सईया अन्हरिया से बोझिल हो,
बाबा अँगने में मांगीला अंजोर ई मथवा नवाईला हो,
बाबा अँगने में मांगीला अंजोर ई मथवा नवाईला हो ॥
गजमोती चउका पुराईला अंचरा बिछाईला हो,
बाबा अँगने में फूलवा त लागेला फलवा न खाईला हो,
बाबा अँगने में फूलवा त लागेला फलवा न खाईला हो ॥
ताना देके कहेले गोतीनिया ई बाँझ बा बहिनिया नु हो,
बाबा सुनी सुनी बोलिया गोतीनिया मो लोरवा बहाईला हो,
बाबा सुनी सुनी बोलिया गोतीनिया मो लोरवा बहाईला हो ॥
चुप रहु धीर करूँ दुखिया ना सुन रही कोखिया नु हो,
बस आजु के नव ये महिनावा होरिला मुस्काईला हो,
बस आजु के नव ये महिनावा होरिला मुस्काईला हो,
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो,
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो ॥