स्वर: पवन सिंह (Pawan Singh)
उषा अर्घ्य, सूर्योदय वंदना, घाट पर अर्घ्य अर्पण के समय
पवन सिंह भावुक छठ गीत
Rauwa Se Ehe हथजोरिया नु हो | Mahima Chhathi Maiya Ke | Pawan Singh | Chhath Geet 2025
"रउवा से एहे हाथ जोड़िया नु हो आदित करि जनि देरिया... रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो जल्दी निकलीं बहरिया"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
पवन सिंह द्वारा गाया यह अत्यंत भावुक व मार्मिक छठ गीत (एल्बम: महिमा छठी मइया के) गंगा घाट पर खड़े व्रतियों और परिजनों की भगवान आदित्य (सूर्यदेव) से भावुक पुकार है। तीन दिनों से निर्जला भूखी-प्यासी नई बहुरिया अर्घ्य सूप लिए जल में खड़ी सूर्यदेव के दर्शन की प्रतीक्षा में अधीर हो रही है, और पवन सिंह दोनों हाथ जोड़कर सूर्यदेव से शीघ्र उदित होकर कृपा दृष्टि डालने की गुहार लगाते हैं।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व के चौथे दिन उषा अर्घ्य के पावन भोर में सूर्यदेव के उदय होने की प्रतीक्षा के क्षणों का अत्यंत भावुक व हृदयस्पर्शी लोकगीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
रउवा से एहे हाथ जोड़िया नु हो
आदित करि जनि देरिया
रउवा से एहे हाथ जोड़िया नु हो
आदित करि जनि देरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
दीनानाथ रउवे से दुनिया अंजोर बा
नजरी के कोर से अंजोर चारू ओर बा
नजरी के कोर से अंजोर चारू ओर बा
दीनानाथ रउवे से दुनिया अंजोर बा
नजरी के कोर से अंजोर चारू ओर बा
नजरी के कोर से अंजोर चारू ओर बा
रउवे बिना उगल बा अन्हरिया नु हो
आजु फेरीं ना नजरिया
रउवे बिना उगल बा अन्हरिया नु हो
आजु फेरीं ना नजरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
तीन दिन तियाई बरतिया से भूखल
पानी के पियासल तिरिया मुंह बाटे सूखल
तीन दिन तियाई बरतिया से भूखल
पानी के पियासल तिरिया मुंह बाटे सूखल
पानी के पियासल तिरिया मुंह बाटे सूखल
पवन पसारी के बगरिया नु हो आजु करेले गोहरिया
पवन पसारी के बगरिया नु हो आजु करेले गोहरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
रउवा से एहे हाथ जोड़िया नु हो
आदित करि जनि देरिया
रउवा से एहे हाथ जोड़िया नु हो
आदित करि जनि देरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया
रोवताड़ी नयकी बहुरिया नु हो
जल्दी निकलीं बहरिया