स्वर: शारदा सिन्हा (Sharda Sinha)
संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य व सूर्य वंदना के समय
शारदा सिन्हा कालजयी
हो दीनानाथ - शारदा सिन्हा | Ho Dinaanaath By Sharda Sinha (Full HD)
"सोना सट कुनिया हो दीनानाथ हे घूमइछा संसार... आजू के दिनवा हो दीनानाथ हे लागल एती बेर"
आध्यात्मिक भावार्थ एवं महिमा
पद्म भूषण शारदा सिन्हा जी द्वारा स्वरबद्ध 'हो दीनानाथ' छठ महापर्व का सबसे प्रतिष्ठित व भावपूर्ण पारंपरिक मैथिली गीत है। इसमें भक्त सूर्यदेव से पूछते हैं कि आज अर्घ्य के पावन दिन उदित होने में इतनी देर क्यों लगी। भगवान भास्कर उत्तर देते हैं कि राह में दुखियों, अंधों, निःसंतानों और रोगियों को वरदान व जीवनदान देते हुए आने में विलंब हुआ।
सांस्कृतिक परंपरा एवं संदर्भ
छठ महापर्व में उषा अर्घ्य व संध्या अर्घ्य के समय गंगा घाटों और घर-घर में गूंजने वाला सबसे भावपूर्ण व कालजयी मैथिली छठ गीत।
छठ गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics)
सोना सट कुनिया हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार
हे घूमइछा संसार
सोना सट कुनिया हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार
हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार
आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष
एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दिएइते गे अबला
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया
एकटा बाझिनिया
बालक दिएइते गे अबला
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा कोडिया पुरुष
एकटा कोडिया पुरुष
कायावा की एइते गे अबला
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर
हे लागल एती बेर